जवाब दो बिहार
कहां है खामिया सोच में या फिर परंपराओं में, क्यों बनी है ऐसी तस्वीर तुम्हारी पूरा देश पूछता है सवाल क्यों बिहारी घरेलू हिंसा में सबसे आगे.....
घरेलू हिंसा में सबसे आगे हैं बिहारी वो रिक्शा चालक हो या कोई ऊंची पोस्ट पर बैठा अधिकारी या फिर हो कोई नेता और अभिनेता लेकिन बिहार का नाम आते ही चहक उठता है। शायद हर जगह उनकी मौजूदगी ही कराती है उनकी सफलता का एहसाह।
लेकिन देश का एक अहम हिस्सा कहे जाने वाले बिहार की असल में तस्वीर क्या है यह तो शायद वहां कि महिलाएं ही बेहतर बयान कर सकती हैं। आज देश में सबसे ज्यादा अगर किसी राज्य के लोग रोजी रोटी की तलाश में अपना घर बार छोड़कर बाहर निकलते हैं तो वह राज्य है बिहार। लेकिन गरीबी का दर्द झेल रहे बिहार की महिलाओं से अगर पूछा जाए कि वो अपने आपको घर की चारदीवारी में कितना सुरक्षित महसूस करती हैं तो शायद यह तस्वीर और साफ हो जाएगी। विवाहित महिलाओं के साथ पारिवारिक हिंसा, शारीरिक या यौन उत्पीड़न की सबसे अधिक घटनाएं आज भी बिहार में होती हैं जबकि हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा सबसे कम है। यह बात हम नहीं कहते बल्कि इसका प्रमाण केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय दे रहा। मंत्रालय द्वारा वर्ष 2005-06 में कराए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण एनएफएचएस की जारी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। एनएफएचएस के संयोजक एवं जनसंख्या विज्ञान अंतरराष्ट्रीय संस्थान के प्रो सुलभ परासुरामन ने रिपोर्ट जारी करने के बाद बताया कि वर्ष 2005-06 में 15 से 49 आयु वर्ग की 4540 महिलाओं और 15 से 54आयु वर्ग के 1592 पुरुषों से पूछताछ के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि बिहार में 59 प्रतिशत विवाहित महिलाएं शारीरिक या यौन उत्पीड़न की शिकार होती हैं जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में यह दर 46 प्रतिशत है। उड़ीसा में प्रत्येक दस विवाहित महिलाओं में से कम से कम चार इनसे पीडि़त है और हिमाचल प्रदेश में मात्र छह प्रतिशत महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की घटनायें हुई है।
दिल्ली हो या मुंबई या फिर हो क्यों न कोलकाता वहां प्रवासी हर दूसरा इंसान रखता है कहीं न कहीं बिहार से ताल्लुक और जुड़ी हैं उसकी बिहार से यादें। पूरे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पलायन करने वालों में बिहारी सबसे आगे हैं। शायद उनमें तरक्की करने की लालसा ही उन्हें परदेश खींचकर लाती है। ऐसे में तस्वीर बिल्कुल साफ है की उनकी सोच बहुत अच्छी है फिर भी बिहार की जड़ो को दीमक की तरह धीरे-धीरे खोखला करती वहां की घरेलू हिंसा की वारदातें आज भी जस की तस बनी हुई हैं। क्यूं नहीं घट रहें यह आंकड़े कौन देगा इसका जवाब कौन है इसका जिम्मेदार, कहां है खामिया जानना चाहते हैं हम सभी जवाब दो बिहार.....
माफ कीजिए मेरा इरादा किसी समुदाए विशेष को टारगेट करना नहीं बल्कि दिनोंदिन विकास की आंधी में पीछे छूटती जा रह गई कुरीतियों को कुरेदना है जो हमारे जहन में होकर भी नहीं होती या उस विषय पर हम सोचना ही नहीं चाहते। मैं जानना चाहती हूं कि क्या यह आइना हमारी रुढ़ीवादी मानसिकता का है या फिर इसके पीछे छिपी है हमारी पीढ़ी दर पीढ़ी से चली आ रही परंपराएं कहाँ है खामिया
4 टिप्पणियां:
ब्लोग्स की दुनिया में आपका स्वागत है, अच्छी पोस्ट लिखी
अपने ब्लॉग के पोस्ट कमेंट्स सेक्शन से वर्ड वेरिफिकेशन हटा दे
स्वागत है आपका.
कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें, टिप्पणी देने में सुविधा होगी.
your welcome to enter into blogvani. God bless you.Your writing is lovely, so a lot of love to you.
श्रद्धा, सवाल तो सही उठाया आपने। दरअसल, बिहार जैसे राज्यों में असली समस्या ये है कि जो भी उत्पीड़न होता है वो पुलिसिया रिकार्ड में दर्ज नहीं होता। पिछड़ापन अपने साथ कई बिमारियां लाता है। फिर ये सच सिर्फ बिहार का ही नहीं कमोबेश पूरे मुल्क का है। हां, बिहार में कई तरह के पिछड़ेपन के साथ ही इसकी हालत ज्यादा गंभीर है। हलांकि महिला उत्पीड़न की वजहें सिर्फ आर्थिक पिछड़ापन नहीं, बल्कि सामंती, पुरुषवादी सोच में है। पंजाब में दूसरे तरीके का उत्पीड़न है जहां लड़कियों को जनम ही नहीं लेने दिया जाता, और बिहार जैसे सूबों में जनम के बाद से जीने नहीं दिया जाता। उम्मीद है, आगे भी आप लिखती रहेगीं गंभीरता के साथ।
एक टिप्पणी भेजें